भारत के विरुद्ध घिरता रणनीतिक चक्रव्यूह: चीन-पाक गठजोड़ और उभरती चुनौती
आज जब भारत विश्व मंच पर एक उभरती महाशक्ति के रूप में अपने ध्वज को ऊँचा उठा रहा है, इसी समय इसके विरुद्ध एक सुनियोजित रणनीतिक चक्रव्यूह भी रचा जा रहा है। 2025 वर्ल्डवाइड थ्रेट असेसमेंट, जिसे अमेरिका की डिफेंस इंटेलीजेंस एजेंसी द्वारा प्रस्तुत किया गया है, यह संकेत देता है कि आने वाला समय केवल प्रतिस्पर्धा का नहीं, बल्कि निर्णायक टकरावों का भी हो सकता है। चीन अब केवल सीमाओं तक सीमित शक्ति नहीं रहा, बल्कि वह वैश्विक वर्चस्व स्थापित करने की महत्वाकांक्षा से प्रेरित है। उसकी नीतियाँ स्पष्ट रूप से विस्तारवादी हैं—चाहे वह सीमाओं पर दबाव बनाना हो या पड़ोसी देशों को अपने प्रभाव में लेना। भारत के संदर्भ में चीन की रणनीति सीधी टक्कर से अधिक दबाव, घेराबंदी और अप्रत्यक्ष चुनौती की रही है। यह एक ऐसा प्रतिद्वंद्वी है, जो सामने से कम और परोक्ष रूप से अधिक आक्रमण करता है। पाकिस्तान, जो बार-बार प्रत्यक्ष संघर्ष में भारत के सामने पराजित होता रहा है, अब एक बड़े खेल का हिस्सा बन चुका है। चीन के साथ उसकी बढ़ती निकटता यह संकेत देती है कि वह एक प्रॉक्सी शक्ति के रूप में कार्य कर सकता है। सैन्य सहयोग, तकनीकी सहायता और अवसंरचनात्मक निवेश
इन सभी माध्यमों से चीन, पाकिस्तान को केवल सशक्त नहीं कर रहा, बल्कि उसे भारत के विरुद्ध एक निरंतर सक्रिय मोर्चा बनाए रखने हेतु प्रेरित कर रहा है। उत्तर में चीन और पश्चिम में पाकिस्तान यह स्थिति किसी भी राष्ट्र के लिए अत्यंत चुनौतीपूर्ण होती है। किंतु भारत ने बार-बार यह सिद्ध किया है कि वह हर चुनौती का डटकर सामना करने में सक्षम है। चीन की आर्थिक रणनीतियाँ केवल व्यापार तक सीमित नहीं हैं; वे प्रभाव स्थापित करने का माध्यम हैं। दक्षिण एशिया में उसकी बढ़ती पकड़ भारत की आर्थिक स्वतंत्रता को चुनौती देती है।
भारत जहाँ विश्व में संतुलन और सहयोग की नीति अपनाता है, वहीं चीन प्रभुत्व और नियंत्रण की दिशा में आगे बढ़ रहा है। लेकिन भारत अब वह राष्ट्र नहीं रहा जो केवल प्रतिक्रिया देता है; अब यह पहल करता है, रणनीति बनाता है और वैश्विक समीकरणों को प्रभावित करता है। सशक्त सैन्य बल और आधुनिकीकरण,स्वदेशी रक्षा उत्पादन की दिशा में आत्मनिर्भरता ,वैश्विक मंचों पर निर्णायक भूमिका और रणनीतिक साझेदारियों का विस्तार भारत की यही शक्ति उसे एक स्थायी और विश्वसनीय वैश्विक शक्ति बनाती है । उभरते भारत के चुनौतीपूर्ण भविष्य में चीन और पाकिस्तान का गठजोड़ निश्चित रूप से एक चुनौती है, परंतु यह भारत की प्रगति को रोकने में सक्षम नहीं है। भारत ने हर युग में संकटों को अवसर में परिवर्तित किया है और यह समय भी उससे भिन्न नहीं होगा। यह संघर्ष केवल सीमाओं का नहीं, बल्कि संकल्प, स्वाभिमान और वैश्विक नेतृत्व का है। और इसमें भारत पीछे हटने वाला नहीं, बल्कि आगे बढ़कर नेतृत्व करने वाला राष्ट्र है । जिसकी प्रबल शक्ति है जनता का उभरता राष्ट्रवाद ।
✍️योगेंद्र सिंह राजावत

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