ममत्व की सरिता ममत्व की यह निर्मल सरिता , हृदय में जिसके अविरल बहती, वात्सल्य की ऊष्मा पाकर, यह सृष्टि नित्य ही संवरती । अकिंचन सी लगती ह...
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भारत के विरुद्ध घिरता रणनीतिक चक्रव्यूह: चीन-पाक गठजोड़ और उभरती चुनौती
भारत के विरुद्ध घिरता रणनीतिक चक्रव्यूह: चीन-पाक गठजोड़ और उभरती चुनौती आज जब भारत विश्व मंच पर एक उभरती महाशक्ति के रूप में अपने ध्वज को ऊ...
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'निर्मल अंतःकरण' हिंदी कविता hindi kavita
कोलाहलपूर्ण इस जीवन में, परहित की चेतना न जागे। क्षुधा-पीड़ित जन को देखें, तो हम कैसे अन्न ग्रहण करें? यावज्जीवन इस वसुधा पर, मानवता का प...
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'अस्तित्वबोध' एक हिंदी कविता Hindi Poem
बुरा नहीं है बदलाव से थोड़ा डरना, बुरा है डर के मारे रुक जाना। बुरा नहीं है मशहूर होने की चाह रखना, बुरा है मशहूर होने के लिए मुखौटा पहन ...
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वैश्विक शांति का स्वप्न और अमेरिका–ईरान संघर्ष का द्वंद्वात्मक यथार्थ
मानव सभ्यता आज जिस ऐतिहासिक मोड़ पर खड़ी है, वहाँ शांति केवल एक नैतिक आदर्श नहीं, अपितु अस्तित्व की अपरिहार्य अनिवार्यता बन चुकी है। शक्ति...
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पलाश के पुष्प palash ke pushp palash ka ped poem on palash kavita
पलाश की छाँव में बैठा मैं ढूँढ रहा हूँ मुझको पिरोए जा रहा हूँ माला आने वाले बसंत के लिए । पतझड़ में जो महक रहा रंग प्यारा केसरिया प्र...
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